मरुस्थलीकरण से निपटने का विश्व दिवस
मरुस्थलीकरण से निपटने का विश्व दिवस प्रतिवर्ष 17 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य शुष्क क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को रोकने की आवश्यकता को उजागर करना है।
वर्ष 2016 में इस दिवस का विषय था “भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करने के लिए समावेशी सहयोग”, जिसका प्रभावशाली नारा था “पृथ्वी की रक्षा करें। भूमि को पुनर्स्थापित करें। लोगों को जोड़ें।” यह नारा स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर देता है कि भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करने के लिए लोगों की व्यापक भागीदारी और सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
हालांकि भूमि एक मूल्यवान और सीमित प्राकृतिक संसाधन है, लेकिन वर्षों से सतत विकास में इसे अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया है। अब समय आ गया है कि हम इस स्थिति को बदलें। इसलिए आवश्यक है कि खराब हुई भूमि के पुनर्स्थापन और पुनर्वास के लिए समावेशी सहयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि समग्र रूप से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान दिया जा सके।
पिछले कई वर्षों से इस दिवस को मंत्रालय द्वारा विभिन्न संबंधित मंत्रालयों और वैज्ञानिक संगठनों के सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता के साथ मनाया जाता रहा है। इस वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन Ministry of Environment, Forest and Climate Change (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) द्वारा Arid Forest Research Institute, जोधपुर में किया गया।
इस अवसर पर विद्यालयों के बच्चे, किसान, वन एवं प्रबंधन समिति के सदस्य, वैज्ञानिक समुदाय, सरकारी अधिकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी के साथ विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई।
